रंगों का वार्तालाप
लाल बोला मैं लाली रचाऊ
शरमाती हुई दुल्हन को मैं सजाऊ
हरा बोला मैं हरियाली उगाऊ
सबकी आँखों को ठंडक दिलाऊ
नीला बोला मैं आसमान मैं उड़ जाऊ
समुंदर को मेरा रंग दे जाऊ
पीला बोला मैं सूरज मैं समाऊ
सारी दुनिया को सुनहरा बनाऊ
काला बोला मैं रात को छा जाऊ
बुरे कामों को मेरा रंग दे जाऊ
सफ़ेद बोला मैं स्वच्छ और शांत कहेलवाऊ
दो लड़ते दुश्मनों के बीच सुलह करवाऊ
यह सुन कर सब रंग बोले कितना अच्छा हो
अगर हम अपने रंगों को बेरंग बनाले
और अपने आप को सफ़ेद रंग से ही मिलालें
रंगों का भेद छोड़ कर सारी दुनिया एक बनालें
पूनम दोशी

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