Wednesday, 31 July 2013

रंगों का वार्तालाप

रंगों का वार्तालाप 


लाल बोला मैं लाली रचाऊ 
शरमाती हुई दुल्हन को मैं सजाऊ 

हरा बोला मैं हरियाली उगाऊ 
सबकी आँखों को ठंडक दिलाऊ 

नीला बोला मैं आसमान मैं उड़ जाऊ 
समुंदर को मेरा रंग दे जाऊ 


पीला बोला मैं सूरज मैं समाऊ 
सारी दुनिया को सुनहरा बनाऊ 

काला बोला मैं रात को छा जाऊ 
बुरे कामों को मेरा रंग दे जाऊ 

सफ़ेद बोला मैं स्वच्छ और शांत कहेलवाऊ 
दो लड़ते दुश्मनों के बीच सुलह करवाऊ 


यह सुन कर सब रंग बोले कितना अच्छा हो 
अगर हम अपने रंगों को बेरंग बनाले 
और अपने आप को सफ़ेद रंग से ही मिलालें 
रंगों का भेद छोड़ कर सारी  दुनिया एक बनालें 

पूनम दोशी 

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