कदम उठाकर बढ़ो तुम्हारी मंजिल की ओर
तुम्हारे ही हाथ में है तुम्हारी किस्मत की डोर
अब तक जिस लगन से की थी तुमने पढाई
उसी लगन से चढ़ना अब कारकिर्दी की ऊंचाई
अब तक जो बटोरा ज्ञान है, उसे जंग मत लगने देना
नया सिखने की जिज्ञासा को कभी कम मत होने देना
कोई भी मुश्किल ज्यादा देर टिक नहीं पाती है
चमकते हुए सूरज को कोई थाली ढक नहीं पाती है
परिश्रम और कौशल की चाबी अगर जेब में ले का जाओगे
उन्नति का हर ताला इन्ही चाबियों से खोल पाओगे
तुम्हारे अपनों की दुआ हमेशा तुम्हारे साथ होती है
ये अपनी हर सफलता पे महेसूस कर पाओगे
पूनम दोशी



